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hi · Fiction

अजमेर औलख के प्रतिनिधि नाटक

Sukhdev Singh Sirsa

₹499

अजमेर औलख ने अपने नाटकों की प्रस्तुति द्वारा गूंगे इतिहास को स्वर दिया है। उसने रस-रंगहीन नारकीय जीवन भोग रहे और भद्र समाज द्वारा दुत्कारें मेहनती, मज़दूर वर्ग को अपने नाटकों के केन्द्र में स्थान दिया। पंजाबी नाटक में पहली बार औलख का ध्यान पशु योनि भोग रहे उस लघु-मानव की ओर गया, जिसें हालात ने इतना विवश बना दिया था कि उसके आत्म विश्वास, नैतिक मूल्यों और मानवीय गुणों को ग्रहण लग गया था। औलख के नाटकों का केन्द्रीय पात्र अपने मनुष्य होने का विश्वास खो चुका वह दुखी, त्रस्त, निर्धन कामगार और किसान है जों कथित सांस्कृतिक व्यवहार और हर तरह के शिर्ष्याचार की ओर पीठ करके खड़ा है। अजमेर औलख के नाटकों के केन्द्रीय पात्र सभ्य, शुचितावादी, आदर्शवादी, महामानव या महानायक नहीं हैं, उन्हें खुद अपने मनुष्य होने पर संदेह है।

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